स्वराज्य संस्थापक छत्रपती शिवाजी महाराज जयंती के अवसर पर हिंदी भाषण chatrapati shivaji maharaj hindi bhashan
आज के कार्यक्रम के सन्माननीय अध्यक्ष महोदय, कार्यक्रम में उपस्थित छात्रों एवं छात्रायें, अध्यापक एवं अध्यापिका। मैं आज आप सभी को श्री छत्रपती शिवाजी महाराज के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बाते बताने जा रहा हूँ।
शहाजी नाम के एक बहोत बडे राजा (जुन्नर) पुणे में राज करते थे। उस जमाने में राजा महाराजाओं को लढाईपर युध्द करने जाना अनिवार्य था। ऐसे समय उनकी धर्मपत्नी जिजाबाई को फरवरी १६३० के
दिन एक बहोत ही सुंदर बालक ने जन्म लिया। उनका नाम शिवाजी रखा गया। दोस्तो, शिवाजी महाराज कुशलतापूर्वक शस्त्रविद्या ग्रहण कर रहे थे। १२ वे वर्ष की उम्र में शिवाजी ने अनेक प्रकार की शिक्षा हासिल कर ली थी। जिजामाता ने अपने देश की अर्थव्यवस्था, राज्य का कार्यभार कैसे चलाना? दुश्मन के साथ युध्द कैसे करना?
किल्ले किस तरह बांधना, घोड़े और हाथी की परीक्षा किस तरह लेना यह सब बातें उन्होंने सिखाई थी। शिवाजी महाराज का विवाह १४ वर्ष की उम्र में सईबाई से हुआ।
शिवाजी महाराज के कार्यकाल के दोरान अफजलखान ने उन्हें मिलने बुलाया और भेट करते समय उनकी गर्दन को अपनी बाई बगल में दबाया तब शिवाजी महाराज को पता चला तो उन्होंने अपने शेर नाखून से वार किया। शिवाजी के शरीर में चिलखत होने से वो बच गये। अफजलखान को जगह पर ही ढेर कर दिया। उसी तरह शाहिस्तेखान की चारो उँगलीयाँ तलवार से शिवाजी महाराज ने कांट ‘दी थी।
एक बार औरंगजेब बादशाह ने अपने ५० वे जन्मदिन के शुभअवसर पर शिवाजी महाराज को निमंत्रण दिया था। शिवाजी महाराज अपने साथीदारों के साथ जब आगरा गये तब वहा उन्हें कैद कर लिया गया। शिवाजी महाराज को पता था की अब इसके चंगूल से बचना मुश्कील है, तब उन्होंने एक योजना बनाई, पेट में दर्द होने का बहाना बनाया। उनके लिये मिठाई के पिटारे भेजे गये उन पिटारों में संभाजी और शिवाजी बैठकर वहा से निकल गये और उनके सेवक वर्ग मदारी हिरोजी दवा लाने के बहाने गये। इस तरह शिवाजी महाराज ने अपनी चतुराई से औरंगजेब की योजना को उध्वस्त
किया। और अपनी जान बचाई थी। इ.स.१६६६ में आगरा में ये घटना घटी थी। सिंधुदुर्ग और विजयदुर्ग ये जो किल्ले है, आप यदि देखोगे तो हक्काबक्का रह जाओगे क्योंकि समंदर में बने इन किल्लों की बात ही कुछ अलग है। अपनी मातृभाषा मराठी को उच्च दर्जा मिलाना चाहिये इसके लिए शिवाजी महाराज अपने जीवन में हमेशा लडते रहे।
मेरे प्रिय छत्र एवं छात्राएँ में आपको शिवाजी महाराज के बारे में जितना कुछ बताउँगा उतना कम होगा। लेकिन में आपको एक खास बात बताना चाहुगा।
एक दिन शिवाजी महाराज के मन में खयाल आया की कोंढाणा किल्ला अपने हक्क का होना चाहिये। इसे प्राप्त करना उचित है। सोचते ही वहा तानाजी मालुसरे नामक व्यक्ती अपनी शादी का निमंत्रण देने पहुँचे, शिवाजी ने निराश होकर कहां की, आप शादी करो, हमें लढाई पर जाना है। शादी को चार दिन बाकी थे। तानाजी बहुत चतुर थे उन्होंने स्वयं निर्णय लिया की महाराज आप नहीं में खुद जाऊँगा। पहले शादी कोंढाणा की, फिर रायबा की। ५०० सैनिक लेकर तानाजी चल पड़े। दुश्मन को उड़ा दिया। कोंढाणा जीत लिया लेकिन दोस्तों तानाजी खुद वापस नहीं आया। अपने बेटे की शादी की चिंता बिल्कूल नहीं और अपने राजा का वचन निभाया देश का नाम रोशन किया। शिवाजी महाराज को बहुत दुःख हुआ। उन्होंने कहा गढ़ आया पर सिंह गया। भला आज के जमाने में ऐसे बहोत कम लोग मिलते है।
इतना कहकर में शिवाजी महाराज को प्रणाम करता हूँ। और मेरे
दो शब्द यहीं समाप्त करता हूँ।
जयहिंद जय महाराष्ट्र…..
जय भवानी जय शिवाजी……..








