राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जयंती हिंदी भाषण rashtrapita mahatma gandhi
आज के कार्यक्रम के अध्यक्ष महोदय, सभी छात्रों साथी एवं स्कुल के समस्त कर्मचारी वर्ग।
हमारे भारत देश मे कई महान आर्दश नेता पैदा हुये है। मगर उनमें से एक थे महात्मा गांधीजी. उनका जन्म २ अक्टूबर १८६९ को पोरबंदर मे हुआ। उनके पिता करमचंद गांधी राजकोट मे दिवान थे। ये हमने, अपनी बहुत सारी किताबों में पढ़ा है। महात्मा गांधींजी बहोत सीधे-साधे बालक थे। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा मॅट्रिक की १८८७ से पास किये। बॅरिस्टर की पढाई के लिये इंग्लैंड को गये और स्वदेश लौटते ही वकालत शुरू कर दी थी।
महात्मा गांधीजी ने सन १९१८ में गुजरात के खेडा जिल्हा में किसान की समस्या हेतू सत्याग्रह किया था। उन दिनो से महात्माजी को समुच भारत देशवासी पहचानने लगे। भारत देश आजाद होने तक गांधीजी आजादी की लडाई लडते रहें। उस समय को गांधी युग कहते है। १९३० में सविनय कायदेभंग और १९४२ को ‘चले जाओ’ मोहीम ऐतिहासिक बनी। दोस्तो १५ अगस्त १९४७ को भारत देश आजाद हुआ। गांधीजी स्वयं कपडा, चरखे पर तैयार करते थे। विदेशी कपडा उन्होंने बिल्कूल नहीं पहना। सत्य और अहिंसा पर
चलनेवाले इस महान इन्सान ने तीन बंदर (वानर) की मूर्तिया बनाई थी। एक थी मुँह पर हाथ रखे, दूसरी कान पर हाथ रखे, और तिसरी थी आँख पर हाथ रखे। इन मूर्तियों के माध्यम से गांधीजी ये संदेश देना चाहते थे, बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो, और बुरा न बोलो। गांधीजी का कहना था की अहिंसा के मार्ग हृदयपरिर्वतन करके दुश्नम को भी दोस्त बनाया जा सकता है। यही दृढ विश्वास उन्हें था। नमक पर लगे कर कानून को समाप्त कर दिया। समाज सुधार करने में गांधीजी हमेशा सर्वापर थे। इ.स. १९३३ में हरिजन सेवक संघ की स्थापना की। उसी के साथ साथ हरिजन नामक साप्ताहिक शुरू किया। हर गाव, हर खेडा आर्थिक और राजनीतिक दृष्टि से मजबूत होना चाहिये और गांव के लोग शहर में न जाये वे गाव से अपना व्यापार काम करे यही सोच उनकी थी।
गांधीजी ने लोगों के हित के लिये इतनी पदयात्रा की, शायद कोई देश में अब तक किसी भी नेता या सामाजिक कार्यकर्ता ने नहीं की होंगी।
गांधीजी समाज का कल्याण करने के लिये सदा तत्पर रहते थे। पर नियती को कुछ अलग ही मंजूर था और नत्थुराम गोडसे नामक व्यक्ती ने ३० जानेवारी १९४८ को उन पर गोली चलाई। और गांधीजी के प्राण पखेरू उड गये।
जब तक सूरज चाँद रहेगा,
बापू तेरा नाम रहेगा।
जय हिंद जय भारत………










