हिंदी तत्सम आणि तद्भव शब्द ओळखण्याची सोपी ट्रिक hindi tatsam tadbhav trick
नियम -1.
यदि किसी शुद्ध शब्द में क्ष, त्र, ज्ञ, श्र, ष, ऋ, द्वि, विसर्ग (:) र्म, का प्रयोग हुआ हो तो वह शब्द प्रायः तत्सम होता है-
पक्षी पंछी
अक्षर आखर
ज्ञान ग्यान
प्रतिज्ञा – प्रतिग्या
ऋतु – रितु
हृदय – हिय
धर्म धरम
कर्म- काम
रात्रि – रात
श्रावण – सावन
दुःख – दुख
पत्रिका – पाती
अश्रु – आँसू
प्रातः – प्रात
नियम -2.
यदि किसी शुद्ध शब्द का निर्माण संस्कृत की संधि से हुआ हो तो वह शब्द सदैव तत्सम होता है-
नदी + ईश – नदीश
विद्या + धन – विद्याधन
यदि + अपि – यद्यपि
नारी + उत्थान – नार्युत्थान
अभि + आगत – अभ्यागत
सरः + ज सरोज
निः + रोग नीरोग
नियम -3.
यदि किसी शब्द में संस्कृत के 22 उपसर्गों में से किसी एक या अधिक का प्रयोग हुआ हो तो वह शब्द प्रायः तत्सम होता है-
प्रतिदिन
अभिज्ञान
विकार
अवतार
आजीवन
अवगुण
प्रभाव
अभिनव
सुगम
अतिशय
परिचय
अपयश
स्वदेश
संयम
निर्जन
अतिरिक्त
अभिराम
संगम
उन्नति
प्रयोग
नियम -4.
यदि किसी शब्द का प्रारंभ य और व से होता हो तो वह शब्द प्रायः तत्सम न होकर तद्भव होता है-
यशोदा – जसोदा
योगी – जोगी
यशवंत – जसवंत
युगल – जुगल
युवा – जवान
यूथ – जत्था
वर्षा – बरखा
वधू – बहु
वन – बन
वाणी – बानी
विवाह – ब्याह
वीणा – बीना
नियम -5.
यदि किसी शब्द पर चंद्रबिंदु लगा हो तो वह तत्सम न होकर तद्भव होता है-
दंत – दाँत
जंघा – जाँघ
ऊष्ट्र – ऊँट
गोधूम – गेहूँ
अक्षि – आँख
चंद्र – चाँद
अंधकार – अँधेरा
पंच – पाँच
पंचम् – पाँचवाँ
नियम -6.
हिंदी की गिनती के शब्द तद्भव होते हैं-
द्वि – दो
चतुः – चार
सप्त – सात
दश – दस
त्रयोदश – तेरह
शत – सौ
लक्ष – लाख
कोटि – करोड़
नियम -7.
यदि किसी शब्द की वर्तनी अशुद्ध हो तो वह शब्द तद्भव होता है-
प्रकाश – प्रकास
गणेश – गनेस
विज्ञान – विग्यान
अमृत – अम्रत
वन – बन
नियम -8.
उत्क्षिप्त व्यंजनों (ड़ ढ़) का प्रयोग तत्सम शब्दों में न होकर तद्भव शब्दों में होता है-
पढ़
दौड़
उड़
चढ़
पढ़
लड़










