१७ सितंबर मराठवाडा मुक्ति संग्राम दिवस पर हिंदी भाषण marathvada muktisangram din hindi bhashan
आदरणीय मुख्याध्यापक, सम्माननीय शिक्षकगण और मेरे प्यारे साथियों,
आप सभी को मेरा सादर नमस्कार।
आज हम सभी यहाँ 17 सितंबर – मराठवाड़ा मुक्ति संग्राम दिवस के अवसर पर एकत्रित हुए हैं। यह दिन हमारे इतिहास का एक महत्वपूर्ण और गौरवपूर्ण दिन है।
15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ, लेकिन उस समय मराठवाड़ा क्षेत्र हैदराबाद के निजाम के शासन के अधीन था। निजाम के शासन से मुक्ति पाने के लिए मराठवाड़ा के लोगों ने स्वतंत्रता आंदोलन शुरू किया। अनेक स्वतंत्रता सेनानियों और सामान्य नागरिकों ने इस संघर्ष में साहस और त्याग का परिचय दिया।
इस आंदोलन में स्वामी रामानंद तीर्थ सहित अनेक वीर सेनानियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लोगों ने अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध एकजुट होकर संघर्ष किया। उनके त्याग, साहस और देशभक्ति के कारण अंततः 17 सितंबर 1948 को मराठवाड़ा भारतीय संघ में शामिल हुआ।
यह दिन हमें उन सभी ज्ञात-अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान की याद दिलाता है, जिन्होंने स्वतंत्रता और लोकतंत्र के लिए संघर्ष किया।
मराठवाड़ा मुक्ति संग्राम दिवस केवल इतिहास को याद करने का दिन नहीं है, बल्कि एकता, साहस, देशभक्ति और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने का संदेश देने वाला दिन है।
आइए, आज के दिन हम सभी यह संकल्प लें कि देशाच्या एकता और अखंडता की रक्षा करेंगे, संविधान का सम्मान करेंगे और एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपने कर्तव्यों का पालन करेंगे।
जिन वीरों ने स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया, उन्हें हमारा शत-शत नमन!
भारत माता की जय!
वंदे मातरम्!
जय हिंद!










