श्रावण बाळ आणि अयोध्येचा राजा दशरथ shravanbal ani raja dashratha moral stories दाट जंगल होते. रात्रीची वेळ होती अयोध्येचा राजा दशरथ शिकारीसाठी एका झाडावर बसलेला होता. जवळून एक नदी वाहत होती. अचानक नदीच्या बाजूने बुडबुड असा आवाज आला. दशरथाला वाटले कोणी पशू जंगलात पाणी पीत असावा त्याने आवाजाच्या दिशेने बाण सोडला. आणि त्याच क्षणी हाय मेलो हे शब्द दशरथाने ऐकले. आपला बाण एका माणसाला लागला आहे हे त्याच्या लक्षात आले. लगेच झाडावरून त्या माणसाजवळ गेला. छातीत बाण घुसल्यामुळे एक कुमार कण्हत होता. रिकामा कमंडलू जवळच पडला होता. दशरथाने त्याच्या छातीतुन बाण काढून टाकला आणि विचारले कुमार तू कोण आहेस मला क्षमा कर हे पाणी पी. कुमार क्षीण आवाजात म्हणाला माझे नाव श्रावण मी आता मरणार जवळच एका झाडाखाली माझे आई-वडील आहेत. ते म्हातारे आहेत आंधळे आहेत. त्यांना फार तहान लागली आहे. कृपा करून त्यांना पाणी नेऊन द्या एवढे बोलून श्रावणाने प्राण सोडला. कमंडलूतून पाणी घेऊन दशरथ राजा श्रावणाच्या आई वडिलांकडे गेला. परंतु त्याला बोलण्याचा धीर होईना श्रावणाचे वडील म्हणाले बाळ एवढा उशीर का केलास तू बोलत का नाहीस दशरथ म्हणाला मी तुमचा श्रावण नाही मी अयोध्येचा राजा दशरथ आहे माझ्या हातून श्रावण चुकून मारला गेला मला क्षमा करा. हे ऐकून श्रावणाचे वडील म्हणाले अरे आमचा लाडका श्रावण आम्हाला या कावडीतून काशीयात्रेला नेत होता तो आमचे कपडे धूत असे आमचे जेवण तयार करीत असे. आम्हाला जेवू घालीत असे औषध पाणी देत असे फार प्रेमाने आमची सेवा करीत असे श्रावण म्हणजे आमचा प्राण होता. दशरथा आमच्या श्रावणाला तु ठार मारले आता पुत्र शोकाने आम्ही दोघेही मरणार आहे. मी तुला शाप देतो की तू सुद्धा पुत्र शोकाने मरशील. मग त्या वृद्ध आईवडिलांनी श्रावण बाळ श्रावण बाळ असे म्हणत प्राण सोडला.
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| अं.क्र. | बोधकथेचे नाव | वाचन लिंक |
| 1. | भित्रा ससा | क्लिक करा |
| 2. | एकीचे बळ | क्लिक करा |
| 3. | लोभीपणा | क्लिक करा |
| 4. | चतुर म्हातारा | क्लिक करा |
| 5. | कुत्रा व गाढव | क्लिक करा |
| 5. | नाटक | क्लिक करा |
| 6. | एकीचे बळ | क्लिक करा |
| 7. | वेळेचे महत्व | क्लिक करा |
| 8. | अति विचाराने नुकसानच होते | क्लिक करा |
| 9. | नेहमी विचार करून बोलावे | क्लिक करा |
| 10. | दिसते तसे नसते | क्लिक करा |
| 11. | दुसऱ्याच्या व्यंगावर हसू नये | क्लिक करा |
| 12. | पोपटपंची | क्लिक करा |
| 13. | भिमाचे गर्वहरण | क्लिक करा |
| 14. | श्रावण बाळ आणि राजा दशरथ | क्लिक करा |
| 15. | लांडगा आणि कोकरू | क्लिक करा |
| 16. | पर्वत आणि उंदीर | क्लिक करा |
| 17. | मोर आणि करकोचा | क्लिक करा |
| 18. | वाघोबा आणि ससा | क्लिक करा |
| 19. | माकड आणि मगर | क्लिक करा |
| 20. | सिंह आणि उंदीर | क्लिक करा |
| 21. | लावा पक्षी आणि तिचे पिल्ले | क्लिक करा |
| 22. | माणसाला किती जमिनीची गरज | क्लिक करा |
| 23. | सुखी माणसाचा सदरा | क्लिक करा |
| 24. | ऐकावे जनाचे करावे मनाचे | क्लिक करा |
| 25. | फुल भर दुधाची कहाणी | क्लिक करा |
| 26. | नालाचा खेळा पराभवास कारण | क्लिक करा |
| 27. | हत्तीची सभा | क्लिक करा |
| 28. | नागार्जुन एक महान रसायन शास्त्रज्ञ | क्लिक करा |
| 29. | माणूस आणि उंदीर | क्लिक करा |
| 30. | एक तरुण माणूस | क्लिक करा |
| 31. | रानटी व गावठी हंस | क्लिक करा |
| 32. | कबूतर आणि मुंगी | क्लिक करा |
| 33. | शेतकरी व बैल | क्लिक करा |
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| 36. | कस्तुरी मृग | क्लिक करा |
| 37. | एक डोळा असलेले हरीण | क्लिक करा |
| 38. | सिंह आणि इतर प्राणी | क्लिक करा |
| 39. | नदी झाड आणि वारा | क्लिक करा |
| 40. | कुरापती उंदीर | क्लिक करा |
| 41. | कोकिळा कावळा आणि घुबड | क्लिक करा |
| 42. | लोभी कुत्रा | क्लिक करा |
| 43. | संपत्तीचा उपयोग | क्लिक करा |
| 44. | संपत्तीचा खरा उपयोग | क्लिक करा |
| 45. | ससा आणि त्याचे मित्र | क्लिक करा |
| 46. | मनोबल | क्लिक करा |
| 47. | अति तेथे माती | क्लिक करा |
| 48. | गर्विष्ठ मेणबत्ती | क्लिक करा |
| 49. | आत शिरणारी पावले | क्लिक करा |
| 50. | हरीण आणि कोल्हा | क्लिक करा |
| 51. | कासव आणि बेडूक | क्लिक करा |
| 52. | माणूस आणि उंदीर | क्लिक करा |
| 53. | सोन्याचे अंडे देणारी कोंबडी | क्लिक करा |
| 54. | गाढवाचा गैरसमज | क्लिक करा |
| 55. | प्रेमळ शब्द | क्लिक करा |
| 56. | वस्तूची उपयुक्तता | क्लिक करा |
| 57. | लालची कुत्रा | क्लिक करा |
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