सिंह व इतर प्राणी lion and animals marathi bodhkatha जंगलचा राजा सिंह व इतर पशू यांची एकत्र अशी एके दिवशी एक सभा भरली. या सभेत सिंह व इतर पशू यात एक करार झाला. सर्वांना एक विचाराने चालावे व जे काही मिळेल ते सारखे वाटून घ्यावे असे ठरले. एके दिवशी सिंह, कोल्हा, लांडगा व तरस या चौघांनी मिळून एक हरिण मारले व त्याचे कोल्ह्याने चार सारखे वाटे केले. त्यावेळी सिंह पुढे होऊन त्यातील एका वाट्याकडे बोट दाखवून म्हणाला, ‘अरे, हा माझा वाटा मी कर म्हणून घेणार, दुसराही वाटा माझाच, कारण तुम्ही जो पराक्रम केलात तो सर्व माझ्या बळावरच नाही का ?’ मग तिसऱ्या भागाकडे पाहून व मान हलवून सिंह पुढे म्हणाला, ‘ज्या अर्थी तुम्ही माझी प्रजा व मी तुमची राजा आहे, त्या अर्थी तुम्ही हा वाटा मला भक्तीने अर्पण करालच म्हणजे तोही माझाच व चौथा तर माझाच वाटा. ‘पुढे आपले प्रजेविषयीचे प्रेम व्यक्त करीत व राजेपण दाखविण्यासाठी सिंह म्हणाला, ‘परंतु हा चौथा वाटा मी जतन करून ठेवणार आहे कारण सैन्यासाठी अन्नसामग्री अशी नाही व ती असणं आवश्यक आहे. अडचणीच्या वेळी ती उपयोगी पडेल. पुढे येणाऱ्या अडचणीची आधी सोय करणं ही राजनीतीला धरून आहे, नाही का ? मी काय म्हणतो ते समजलं असेलच अन् ते जर तुम्हाला मान्य असेलच अन् ते जर तुम्हाला मान्य नसेल तर त्यात तुमचाच नाश आहे.’
तात्पर्य :- दुर्बल व शक्तिमान यांची एकी फार दिवस टिकणे शक्य नाही. कारण एकत्र येताना बलवान लोक ज्या शपथा घेतात त्या शक्तीच्या जोरावर मोडूसुद्धा शकतात. अशा वेळी दुर्बलांनी त्यांच्याशी संबंध ठेवणेच वेडेपणाचे होय.
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| अं.क्र. | बोधकथेचे नाव | वाचन लिंक |
| 1. | भित्रा ससा | क्लिक करा |
| 2. | एकीचे बळ | क्लिक करा |
| 3. | लोभीपणा | क्लिक करा |
| 4. | चतुर म्हातारा | क्लिक करा |
| 5. | कुत्रा व गाढव | क्लिक करा |
| 5. | नाटक | क्लिक करा |
| 6. | एकीचे बळ | क्लिक करा |
| 7. | वेळेचे महत्व | क्लिक करा |
| 8. | अति विचाराने नुकसानच होते | क्लिक करा |
| 9. | नेहमी विचार करून बोलावे | क्लिक करा |
| 10. | दिसते तसे नसते | क्लिक करा |
| 11. | दुसऱ्याच्या व्यंगावर हसू नये | क्लिक करा |
| 12. | पोपटपंची | क्लिक करा |
| 13. | भिमाचे गर्वहरण | क्लिक करा |
| 14. | श्रावण बाळ आणि राजा दशरथ | क्लिक करा |
| 15. | लांडगा आणि कोकरू | क्लिक करा |
| 16. | पर्वत आणि उंदीर | क्लिक करा |
| 17. | मोर आणि करकोचा | क्लिक करा |
| 18. | वाघोबा आणि ससा | क्लिक करा |
| 19. | माकड आणि मगर | क्लिक करा |
| 20. | सिंह आणि उंदीर | क्लिक करा |
| 21. | लावा पक्षी आणि तिचे पिल्ले | क्लिक करा |
| 22. | माणसाला किती जमिनीची गरज | क्लिक करा |
| 23. | सुखी माणसाचा सदरा | क्लिक करा |
| 24. | ऐकावे जनाचे करावे मनाचे | क्लिक करा |
| 25. | फुल भर दुधाची कहाणी | क्लिक करा |
| 26. | नालाचा खेळा पराभवास कारण | क्लिक करा |
| 27. | हत्तीची सभा | क्लिक करा |
| 28. | नागार्जुन एक महान रसायन शास्त्रज्ञ | क्लिक करा |
| 29. | माणूस आणि उंदीर | क्लिक करा |
| 30. | एक तरुण माणूस | क्लिक करा |
| 31. | रानटी व गावठी हंस | क्लिक करा |
| 32. | कबूतर आणि मुंगी | क्लिक करा |
| 33. | शेतकरी व बैल | क्लिक करा |
| 34. | बढाईखोर माणूस | क्लिक करा |
| 35. | शेतकरी आणि साप | क्लिक करा |
| 36. | कस्तुरी मृग | क्लिक करा |
| 37. | एक डोळा असलेले हरीण | क्लिक करा |
| 38. | सिंह आणि इतर प्राणी | क्लिक करा |
| 39. | नदी झाड आणि वारा | क्लिक करा |
| 40. | कुरापती उंदीर | क्लिक करा |
| 41. | कोकिळा कावळा आणि घुबड | क्लिक करा |
| 42. | लोभी कुत्रा | क्लिक करा |
| 43. | संपत्तीचा उपयोग | क्लिक करा |
| 44. | संपत्तीचा खरा उपयोग | क्लिक करा |
| 45. | ससा आणि त्याचे मित्र | क्लिक करा |
| 46. | मनोबल | क्लिक करा |
| 47. | अति तेथे माती | क्लिक करा |
| 48. | गर्विष्ठ मेणबत्ती | क्लिक करा |
| 49. | आत शिरणारी पावले | क्लिक करा |
| 50. | हरीण आणि कोल्हा | क्लिक करा |
| 51. | कासव आणि बेडूक | क्लिक करा |
| 52. | माणूस आणि उंदीर | क्लिक करा |
| 53. | सोन्याचे अंडे देणारी कोंबडी | क्लिक करा |
| 54. | गाढवाचा गैरसमज | क्लिक करा |
| 55. | प्रेमळ शब्द | क्लिक करा |
| 56. | वस्तूची उपयुक्तता | क्लिक करा |
| 57. | लालची कुत्रा | क्लिक करा |
| 58. | कुत्र्याची दूरदृष्टी | क्लिक करा |
| 59. | पोपटाची विद्या | क्लिक करा |
| 60. | प्रत्युत्तर | क्लिक करा |
| 61. | बोधकथा संग्रह | क्लिक करा |











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