” विद्वत्ता हि कोठेही चमकतेच ” बोधकथा marathi bodhkatha
फार फार पूर्वीची गोष्ट आहे. अवंतीपूर नगराच्या राजाचे निधन झाले. त्याच्या राणीने आपला सावत्र मुलगा गादीवर बसू नये आणि राज्य आपल्याच मुलाला मिळावं म्हणून सावत्र मुलगा ‘शंकर’ याला राज्याबाहेर घालवून दिले. शिवा जंगलात हिंडत असताना त्याला एक यक्षिण दिसली. तिचे शरीर सिंहाचे, चेहरा स्त्रीचा आणि पंख गरुडाचे होते. शिवाला थांबवून यक्षिण म्हणाली, “हे राजपुत्रा, तू संकटात आहेस. तुझे राज्य तुझ्या सावत्र आईने बळकावले आहे. पण माझ्या प्रश्नाची तू योग्य उत्तर दिल्यास, मी तुझे राज्य तुला मिळवून देईन. तुझे उत्तर चुकले तर मी तुला हिमालयात सोडून देईन.” असे म्हणून तिने राजपुत्राला प्रश्न विचारला की, “असे कोण आहे ? जे सकाळी चार पायांवर चालते, दुपारी दोन पायांवर तर संध्याकाळी तीन पायांवर चालते?” यक्षिणीच्या या प्रश्नावर राजपुत्राने क्षणभर विचार केला आणि लगेच उत्तर दिले. “असा प्राणी म्हणजे मानव आहे. जो आयुष्याच्या सकाळी म्हणजे लहानपणी दोन पाय आणि दोन हातावर रांगतो. आयुष्याच्या दुपारी म्हणजे मोठा झाल्यावर दोन पायांवर चालतो. आणि संध्याकाळी म्हणजे म्हातारपणी दोन पाय आणि काठी अशा तीन पायांवर चालतो.” राजकुमाराचे हे बरोबर दिलेले उत्तर ऐकून यक्षिण खुश झाली. तिने राजकुमाराचे राज्य त्याला परत मिळवून दिले. तात्पर्य:- ज्याला नाही अक्कल त्याची घरोघरी नक्कल मुर्ख माणसाची सर्वत्र उपेक्षा व टिंगल होते.
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| अं.क्र. | बोधकथेचे नाव | वाचन लिंक |
| 1. | भित्रा ससा | क्लिक करा |
| 2. | एकीचे बळ | क्लिक करा |
| 3. | लोभीपणा | क्लिक करा |
| 4. | चतुर म्हातारा | क्लिक करा |
| 5. | कुत्रा व गाढव | क्लिक करा |
| 5. | नाटक | क्लिक करा |
| 6. | एकीचे बळ | क्लिक करा |
| 7. | वेळेचे महत्व | क्लिक करा |
| 8. | अति विचाराने नुकसानच होते | क्लिक करा |
| 9. | नेहमी विचार करून बोलावे | क्लिक करा |
| 10. | दिसते तसे नसते | क्लिक करा |
| 11. | दुसऱ्याच्या व्यंगावर हसू नये | क्लिक करा |
| 12. | पोपटपंची | क्लिक करा |
| 13. | भिमाचे गर्वहरण | क्लिक करा |
| 14. | श्रावण बाळ आणि राजा दशरथ | क्लिक करा |
| 15. | लांडगा आणि कोकरू | क्लिक करा |
| 16. | पर्वत आणि उंदीर | क्लिक करा |
| 17. | मोर आणि करकोचा | क्लिक करा |
| 18. | वाघोबा आणि ससा | क्लिक करा |
| 19. | माकड आणि मगर | क्लिक करा |
| 20. | सिंह आणि उंदीर | क्लिक करा |
| 21. | लावा पक्षी आणि तिचे पिल्ले | क्लिक करा |
| 22. | माणसाला किती जमिनीची गरज | क्लिक करा |
| 23. | सुखी माणसाचा सदरा | क्लिक करा |
| 24. | ऐकावे जनाचे करावे मनाचे | क्लिक करा |
| 25. | फुल भर दुधाची कहाणी | क्लिक करा |
| 26. | नालाचा खेळा पराभवास कारण | क्लिक करा |
| 27. | हत्तीची सभा | क्लिक करा |
| 28. | नागार्जुन एक महान रसायन शास्त्रज्ञ | क्लिक करा |
| 29. | माणूस आणि उंदीर | क्लिक करा |
| 30. | एक तरुण माणूस | क्लिक करा |
| 31. | रानटी व गावठी हंस | क्लिक करा |
| 32. | कबूतर आणि मुंगी | क्लिक करा |
| 33. | शेतकरी व बैल | क्लिक करा |
| 34. | बढाईखोर माणूस | क्लिक करा |
| 35. | शेतकरी आणि साप | क्लिक करा |
| 36. | कस्तुरी मृग | क्लिक करा |
| 37. | एक डोळा असलेले हरीण | क्लिक करा |
| 38. | सिंह आणि इतर प्राणी | क्लिक करा |
| 39. | नदी झाड आणि वारा | क्लिक करा |
| 40. | कुरापती उंदीर | क्लिक करा |
| 41. | कोकिळा कावळा आणि घुबड | क्लिक करा |
| 42. | लोभी कुत्रा | क्लिक करा |
| 43. | संपत्तीचा उपयोग | क्लिक करा |
| 44. | संपत्तीचा खरा उपयोग | क्लिक करा |
| 45. | ससा आणि त्याचे मित्र | क्लिक करा |
| 46. | मनोबल | क्लिक करा |
| 47. | अति तेथे माती | क्लिक करा |
| 48. | गर्विष्ठ मेणबत्ती | क्लिक करा |
| 49. | आत शिरणारी पावले | क्लिक करा |
| 50. | हरीण आणि कोल्हा | क्लिक करा |
| 51. | कासव आणि बेडूक | क्लिक करा |
| 52. | माणूस आणि उंदीर | क्लिक करा |
| 53. | सोन्याचे अंडे देणारी कोंबडी | क्लिक करा |
| 54. | गाढवाचा गैरसमज | क्लिक करा |
| 55. | प्रेमळ शब्द | क्लिक करा |
| 56. | वस्तूची उपयुक्तता | क्लिक करा |
| 57. | लालची कुत्रा | क्लिक करा |
| 58. | कुत्र्याची दूरदृष्टी | क्लिक करा |
| 59. | पोपटाची विद्या | क्लिक करा |
| 60. | प्रत्युत्तर | क्लिक करा |
| 61. | बोधकथा संग्रह | क्लिक करा |
| 62. | विद्वत्ता हि कोठेही चमकतेच | क्लिक करा |









